मोती की खेती से संवरेगी किसानों की जिंदगी
Publish Date: | Tue, 07 Jul 2020 04:13 AM (IST)
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आत्मनिर्भरः ग्रामीणों युवकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण, कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में की जा रही है मोती की खेती
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नदी या तालाब किनारे की जाती है मोती की खेती।
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कार्यक्रम सहायक चंचल भार्गव ने तैयार की है परियोजना।
छिंदवाड़ा (नवदुनिया प्रतिनिधि)। परंपरागत खेती के बजाय अब जिले के किसान आधुनिक खेती पर जोर दे रहे हैं। काजू, फूल के बाद अब किसान मोती की खेती भी कर सकेंगे। मोती की खेती की खासियत ये है कि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। एक मोती के लिए लागत 40 रुपये लगती है। लेकिन आय 100 से 1500 रुपये तक हो सकती है। यही नहीं विदेश में भी मोती की खासी डिमांड है। जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के तहत कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में वरिष्ठ वैज्ञानिक और डॉ. सुरेंद्र पन्नानासे के मार्गदर्शन में मोती की खेती की जा रही है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से केंद्र में पदस्थ चंचल भार्गव कार्यक्रम सहायक द्वारा परियोजना प्राप्त की गई है। भार्गव ने बताया कि जिले में किसान सभी प्रकार की खेती करते हैं, लेकिन मोती की खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक ओडिशा के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वॉकल्चर में मोती की खेती का प्रशिक्षण दिया जाता है।
ऐसे होती है खेती
मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानी अक्टूबर से दिसंबर तक का समय माना जाता है। कम से कम 50 बाई 70 और 12 फीट या बड़े आकार के ताालाब में अधिकतम 15 हजार सीप से मोती उत्पादन किया जा सकता है। मोती संवर्धन के लिए 0.4 हेक्टेयर के तालाब में उत्पादन किया जा सकता है। किसान को पहले तालाब नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है। या फिर इन्हें खरीद भी सकते हैं। इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटठी सी शल्य क्रिया के बाद इसके भीतर चार से 6 मिमी व्यास वाले साधारण गोल या डिजाइनदार बीड़ जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प, आकृति डाली जाती है। फिर सीप को बंद किया जाता है। इन सीपों को नॉयलान बैग में रखकर बांस के सहारे लटका दिया जाता है, तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप की दर से इनका पालन किया जाता है। अंदर से निकलने वाले पदार्थ बीड के चारों ओर जमने लगते हैं जो बाद में मोती का रूप ले लेते हैं। 8 से 10 माह बाद सीप को चीरकर मोती निकाल लिया जाता है। एक सीप की लागत 35 से 40 रुपये आती है, लेकिन मोती का दाम 100 से 1500 रुपये तक होता है। डिजाइनर मोती खासे पसंद किए जा रहे हैं, जिसकी बाजार में डिमांड है। विदेश में भी मोती की डिमांड देखी जा रही है।
Posted By: Nai Dunia News Network
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