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बिजली कंपनी के ठेकेदार के कर्मचारी की मौत, जांच कर मुआवजा देने की मांग

Publish Date: | Mon, 14 Sep 2020 04:09 AM (IST)

ठेकेदार के कर्मचारी की मौत, कंपनी झाड़ रही पल्ला

दमुआ। आए दिन बिजली विभाग में काम करने वाले ठेका मजदूरों की मौत की घटना सामने आ रही हैं, लेकिन विद्युत वितरण कंपनी इस मामले में अपना पल्ला झाड़ रही हैं। शुक्रवार को हिरदागढ़ बाम्हनवाडा क्षेत्र का है, जहां 11 केवी लाइन पर काम करने के दौरान छिंदी कामथ निवासी ठेका मजदूर, रामकिशोर पिता केशव पाटिल की करंट से मौके पर ही मौत हो गई। विद्युत वितरण कंपनी इस हादसे को आत्मविश्वास से भरे जोखिम का नतीजा मानकर पल्ला झाड़ रही है। विद्युत क्षेत्र की ठेका एजेंसी मृतक मजदूर को बीमा राहत देकर मुक्ति पाने की फिराक में है। क्षेत्र में बिजली कंपनी का काम करते समय ठेका मजदूर की मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले बीते वर्ष 5 अगस्त को विद्युत वितरण कंपनी के दमुआ सब स्टेशन पर ठेका कर्मचारी विल्सन रक्षे की भी मौत हो गई थी। लोगों का कहना है कि बगैर सुरक्षा उपकरणों के काम करने से मजदूरों की मौत हो रही है। विद्युत वितरण कंपनी के स्थायी कर्मचारी व लाइनमैन उम्रदराज हो गए हैं, जिसके चलते ये खंभे पर चढ़कर काम नहीं कर पाते। ऐसे में ठेका मजदूरों से काम लिया जाता है। सप्लाई बंद करने के बाद काम करने किया जाता है। ऐसे में हादसे होना शंका जाहिर करता है। लोगों ने मामले की जांच करने और मृतकों के अश्रितों को अर्थिक मदद देने की मांग की है।

इस मामले में लापरवाही किसकी है, ये तो जांच का विषय है, लेकिन जहां तक सुरक्षा उपकरण और अन्य नियमों का पालन करने की बात है हम लगातार निगरानी करते हैं और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।

– एसके गुप्ता डिवीजनल इंजीनियर, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी।

आदिवासी गांवों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग

दमुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के जरिए आदिवासी अधिकार की घोषणा 13 सितंबर 2007 को की गई। घोषणा के 13 साल पूरे होने पर भी आदिवासी गांवों में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं देखा गया है। सर्व आदिवासी संगठन के नेतृत्व में रविवार आदिवासी समाज के युवाओं ने यह बात ज्ञापन के माध्यम से कही। राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम से संबोधित ज्ञापन दमुआ में थाना प्रभारी और प्रोविजनल डीएसपी राहुल कटरे को सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि आदिवासी भूमिहीन तथा अपने घर और जमीन से बेदखल होकर मजदूरी के लिए मजबूर हो रहे हैं। ज्ञापन सौंपने पहुंचे शिक्षित युवा वर्ग में मनीष उइके, सतीश धुर्वे, अनेश बट्टी, मंतोष पुसु, अनिता धुर्वे, सरला उइके, शर्मिला सरेआम, माहू लाल अंकित टेकाम आदि शामिल थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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