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Navratri 2021: नवरात्र में बन रहे खास योग, भक्तों पर रहेगी माता रानी की विशेष कृपा

 
Navratri 2021: , ग्वालियर  नवरात्र पर्व काे लेकर शहर में जबर्दस्त उत्साह है। पंचमी तिथि रविवार काे स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। अश्विनी मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी तिथि 10 से 11 अक्टूबर सुबह 2:14 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि शास्त्रों के अनुासर, मां स्कंदमाता पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं देवी हैं। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है।

स्कंदमाता का स्वरुप मन को मोह लेने वाला होता है। इनकी चार भुजाएं होती हैं, जिससे वो दो हाथों में कमल का फूल थामे दिखती हैं। एक हाथ में स्कंदजी बालरूप में बैठे होते हैं और दूसरे से माता तीर को संभाले दिखती हैं। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसलिए इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। मान्‍यता ये भी है कि इनकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्‍ति होती है।

पूजा विधि व मंत्रः
 स्‍कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीपक से मां की आरती उतारें और आरती के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें। स्‍कंद माता को सफेद रंग पसंद है, इसलिए आप सफेद रंग के कपड़े पहनकर मां को केले का भोग लगाएं। मान्‍यता है क‍ि ऐसा करने से मां निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं। मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है। पूजा के दाैरान सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी। ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ मंत्र का जाप करें।
पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए।


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