10 या 14 नहीं, अब सिर्फ 2 दिन में दिख रहे हैं कोरोना के ये 5 लक्षण, तुरंत जांच कराएं
कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिस तरह से कोरोना के नए-नए खतरनाक वेरिएंट सामने आ रहे हैं, उससे स्थिति और ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। डेल्टा (Delta) और ओमीक्रोन (Omicron variant) जैसे कोरोना के नए वेरिएंट आने के बाद इस घातक वायरस के लक्षण भी तेजी से बदल रहे हैं। कोरोना को आए हुए तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।कोरोना वायरस के लक्षणों (Covid-19 symptoms) को लेकर यह अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने DHSC और रॉयल फ्री लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया है। शोधकर्ताओं के एक समूह ने अध्ययन के दौरान कुछ स्वस्थ लोगों वायरस से संक्रमित किया। उन्होंने समय के साथ उन पर नजर रखी ताकि वे शरीर में वायरस के संपर्क में आने और संक्रमण से विकास और लक्षणों की शुरुआत तक होने वाले परिवर्तनों को देख सकें। यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो पहले दिन से लेकर खात्मे तक संक्रमण की पहचान करता है।शोधकर्ताओं ने यह पाया कि संक्रमण गले से शुरू होकर पांच दिनों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसने संकेत दिया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि मुंह और नाक को मेडिकल मास्क से ढक दिया जाए। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।Corona ke lakshan: कोरोना को आए हुए दो तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।

कोरोना वायरस (Coronavirus)
का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिस तरह से कोरोना के नए-नए खतरनाक वेरिएंट सामने आ रहे हैं, उससे स्थिति और ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। डेल्टा (Delta) और ओमीक्रोन (Omicron variant) जैसे कोरोना के नए वेरिएंट आने के बाद इस घातक वायरस के लक्षण भी तेजी से बदल रहे हैं। कोरोना को आए हुए तीन साल हो गए हैं और अभी तक इसका स्थायी इलाज नहीं मिला है। चिंता की बात यह है कि कोरोना को लेकर आए दिन, जो नई-नई रिसर्च सामने आ रही हैं, वो डरावने वाले हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण अब 10 या 14 दिनों में नहीं बल्कि दो दिन में सामने आ रहे हैं।
कोरोना वायरस के लक्षणों
को लेकर यह अध्ययन
इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने DHSC और रॉयल फ्री लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट
के साथ मिलकर किया है। शोधकर्ताओं के एक समूह ने अध्ययन के दौरान कुछ स्वस्थ लोगों वायरस से संक्रमित किया। उन्होंने समय के साथ उन पर नजर रखी ताकि वे शरीर में वायरस के संपर्क में आने और संक्रमण से विकास और लक्षणों की शुरुआत तक होने वाले परिवर्तनों को देख सकें। यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो पहले दिन से लेकर खात्मे तक संक्रमण की पहचान करता है।
शोधकर्ताओं ने यह पाया कि संक्रमण गले से शुरू होकर पांच दिनों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसने संकेत दिया कि
को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि मुंह और नाक को मेडिकल मास्क से ढक दिया जाए। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।
स्वस्थ लोगों पर हुआ इस तरह का पहला अध्ययन

यह परीक्षण उन 36 स्वस्थ टीक नहीं लगवाने प्रतिभागियों पर किया गया था, जिन्होंने अतीत में कभी भी वायरस का सामना नहीं किया था। प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से 30 वर्ष के बीच थी। 36 प्रतिभागियों में से केवल 18 प्रतिभागी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और 16 लोगों को हल्के या गंभीर लक्षण महसूस हुए।
दो दिन में दिखाई दिए ये लक्षण

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन मरीजों को वायरस से संक्रमित किया गया था उनमें कुछ लोगों हल्के या गंभीर लक्षण महसूस हुए। इन लक्षणों में भरी हुई या बहती नाक, जुकाम, सर्दी और गले में खराश सहित हल्के से मध्यम जैसे लक्षण विकसित हुए। जबकि प्रतिभागियों में से किसी ने भी गंभीर संक्रमण का अनुभव नहीं किया. 13 लोगों ने गंध की भावना के नुकसान की सूचना दी, जो 90 दिनों के भीतर वापस आ गई।
नहीं दिखाई दिए गंभीर लक्षण

शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकतर मरीजों में
कोरोना वायरस के सिर्फ हल्के या मध्यम ही लक्षण
दिखाई दिए। इनमें से किसी भी व्यक्ति ने अपने फेफड़ों में कोई बदलाव या किसी गंभीर प्रतिकूल घटना का अनुभव नहीं किया। किसी भी संभावित दीर्घकालिक प्रभाव की निगरानी के लिए सभी प्रतिभागियों का 12 महीने तक ख्याल रखा जाएगा।
कोरोना से बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके

शोध में कहा गया है कि मुंह और नाक दोनों को ढंकने के लिए उचित फेस मास्क का इस्तेमाल करें। शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि लेटरल फ्लो टेस्ट (एलएफटी) यह जांचने का प्रभावी तरीका है कि क्या वायरस से संक्रमित व्यक्ति संक्रमण को अन्य लोगों तक पहुंचाने में सक्षम है।
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